सोच को अपनी

सोच को अपनी ले जाओ उस शिखर पर,
ताकि उसके आगे सितारे भी झुक जाएं,
ना बनाओ अपने सफर को किसी किश्ती का मोहताज,
चलो इस शान से कि तूफान भी रुक जाय।

दोस्तों अपनी सोच को कभी अपनी इच्छा को कभी भी कम नहीं आकना चाहिए हमें हमेशा यही सोचना चाहिये की भी किसी से कम नहीं है,जो इन्शान अपनी सोच को इच्छा को पर्वत के जैसे विशाल रखते है ना ,वही इन्शान आज के समय कुछ कर सकता है ,दोस्तों हमारी सोच हमारे सपने हि हमें उस बुलंदी तक पहुचाती है जहा जहा सितारे भी हमें निचे दिखाई देती है ,दोस्तों जो सोचता वही कुछ बनता है.

दोस्तों हमेशा याद रखना अपने सपने और सोच के सफर में कभी भी किसी का मोहताज मत बनो कुछ ऐसा करके दिखाओ की लोग आप के मोहताज बने ,ऐसा आदिक बनके आपने सपने को पूरा करो की देखने वाले आपको देखते हही रह जाये,अपने कर्म पथ में आइसे चलो की बड़ी से बड़ी मुश्किल आपके सामने