कद बढ़ा नहीं करते

कद बढ़ा नहीं करते, ऐड़ियां उठाने से
ऊंचाईया तो मिलती हैं, सर झुकाने से।

दोस्तों आज के टाइम में ,कुछ लोगो को अपनी थोड़ी सी कामयाबी से ,घंमड आ जता है ,और वो अपनों के सामने भी अकड़ के बात करते है ,छोटे बड़े का लिहाज भूल जाते है ,कहते है न मेठंक के सर में कचड़े का तिनका आ के लटक जाये तो वो ,मेंथक अपने आपको राजा समझने लगता है ,उसे अहसास तब होता है ,जब वो तिनका थोड़ी सी हवा के झोके में ,उड़ जता है ,और वो मेंथक का मेंथक हि रहता है ,इसलिए दोस्तों हमें दुसरो के कुछ सीखना चाहिए ,न की उसकी बराबरी करनी चाहिए ,और थोड़ी सी कामयाबी मिलने के बाद ,हमें अकड़ के नहीं चलना चाहिए ,हमें सीखना चाहिए ,उन लोगो से जो कामयाबी के सिखर में खड़े है ,और हमेशा नर्म भाव से से रहना चाहिए ना की घमंड से से ,दोस्तों जब कामयाबी सर चढ़ जाती है ना ,तो उतरने में भी देर नहीं होती ,अगर आप हमेशा कामयाबी के शिखर चड़नाचाहते हो तो,सबको इज्जत दो सबको सम्मान दो तो आपको और सम्मन और इज्जत मिलेगा और आप निरंतर सफल होते जाओगे ,

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