हसरत थी तुम्हें पाने की

हसरत थी तुम्हें पाने की पा न सके,
तेरी महफ़िल मे सजके भी आ न सके।
लोग पूछे कई बार मेरे हम सफर,
पर तेरा नाम होंठों पे ला ना सके।।