गर्मी पर हिंदी शायरी

गर्मी और बीबी एक जैसी ही होती है.
इनका पारा बढ़ते ही..
अच्छे अच्छो का पसीना छूटा देती हैं..

दोस्तों इस साल गर्मी कुछ जादा हि परेशान कर रही है इस गर्मी में तो निकलना हि मुस्किल हो गया है ऐपा रही है की तवे पे कोई रोटी सेकता है ,उसी तरह घर की बीबी भी होती है जब गर्मी का पारा चढ़ता तो इंसान घर से नहीं निकल नहीं पता उसी तरह जब बीबी का परा चढ़ता है तो घर से निकने नहीं देती दोनों कही ना कही एक जैसे हि है ,क्यों दोस्तों सही कहा ना,….