दुवा पर शायरी

जो लोग दूसरो को अपनी दुआओं में शामिल करते हैं…
खुशियाँ सब से पहले उन्हीं के दरवाज़े पे दस्तक देती हैं…!!


दोस्तों कहते है ,की जहा दवा कम नहीं आती वहा दुवा कम आती है ,और ये शायद सही है ,दोस्तों भगवन के सामने क्यों जाते है आपनो की ख़ुशी मांगने उन की सुख चैन जो हमारे लिए भगवन के सामने सर झुका कर अ से दुवा करते ,हमारे ख़ुशी के लिए ,और भगवन उसे कुबूल कर लेते है ,दोस्तों कभी कभी हमारे सामने ऐसा वक्त आता है ,जहा दुनिया का कोई डोक्टर दुनिया का कोई बैध कम नहीं आता वहा दुवा र भवन कम आते है ,दोस्तों भले हि आप भगवन तो मत मानो ,पत्थर का मूरत समझो ,मगर कम से कम इतना तो सोचो ,ये दुनिया बनी कैसी है,ये झरने पर्वत पानी हवा जिसे कोई वैज्ञानिक नहीं चालाता सूरज अपने समय में आते है ,और डूब जता है हवा अपने हिसाब से बहती है सही समय में पानी गिरना हरियाली लहलाती है ,इसे कोई इन्शान कंट्रोल नहीं करता या कोई भगवन नहीं तो कौन ,मगर सोचो कोई तो होगा जो इतनी बड़ी दुनिया को बनाया कोई तो होगा ना दोस्तों ,उसी तरह हमारे दुवायो कुबूल करने वाला भगवन भी है ,जहा दुनिया की सभी चीजे ख़त्म हो जाती है तब दुवा काम है,तब दुवा काम आती है ,बड़े बुजुर्गो से सुना है और कहते भी है ,की खुद के लिए मांगने से अच्छा है की दुसरो के लिए मागो ,तो भगवन जल्दी सुनतेहै ,दुसरो के लिए दुवा करोगे तो भगवन आपका भी दुवा काबुल करता है ,तो दोस्तों अगर मांगना हि तो दुसरो के लिए मांगो ,तो आप का भी मनो कामना जल्द पूरा होता है.