दुश्मन के सर को कभी उठने नहीं देंगे,

दुश्मन के सर को कभी उठने नहीं देंगे,
अपने तिरंगे को कभी झुकने नहीं देंगे,
दे देंगे जान की आहुति लेकिन,
दुश्मन के कदम कभी बड़ने नहीं देंगे,