कोरोना पर हिंदी शायरी

वो चैन से सो रहे है शहर बेच कर,
कोई सोहाग बचा रहे है जेवर बेच कर,
बाप ने उम्र गुजर दी घरोंदे बनाने में,
बेटा उसका सांसे बचा रहा है घर बेच कर,
बर्बाद हो गये कई घर दवा खरीदने में,
कुछ लोगो की तिजोरी भर गयी जहर बेच कर..

दोस्तों आज हमारे देश में कोरोना वायरस इस कदर सितम ढा रही की लोगो को अपनी जिन्दगी दुस्वार सी लग रही है लोग इस वायरस की वजह से एक वक्त के रोटी के लिए तरस रहे ,और आज वायरस के वजह से कोरोना मरीजो की संख्या इतनी बड गयी की लोग अपने संक्रमित लोगो के इलाज के लिए अपने घर अपने जेवर बेच कर भी अपनों के जान बचा नहीं पा रहे है..

दोस्तों कड़ी मेहनत करके एक गरीब मजदुर जिन्दगी भर की जमा पूजी से अपनों के लिए घर जमीन खरीद कर रखता है ,लेकिन आज ये नवबत आ गयी है की, उनके घर परिवार वाले सब कुछ बेच कर भी अपनों के एक पल सांसे भी नहीं दे पा रहे है, ये वक्त आ गयी है..

आज वायरस के वजह से कइयो के जिन्दगी और घर बर्बाद हो चुके ,अपनों के जान बचाते बचाते ,उनके पास एक वक्त की रोटी के पैसे भी नहीं बचे है और कई लोग है जो इस महामारी के समय हर किसी को एक दुसरे साथ की जरूरत है लेकिन ये लोग काले धंधे करके अपने तिजोरी भर रहे है.