महबूब का इन्तजार

mahbub ka intjaar

तड़प के देखो कीसी की चाहत में,
तो पता चलेगा,इन्तजार क्या होता है,
यूंही मिल जाये बिना कोई बिना चाहे,
तो कैसे पता चलेगा,की प्यार क्या होता है.

कभी कभी किसी अपने की

kbhi kbhi kisi apne ki

कभी कभी किसी अपने की इतनी याद आती हैं,
कि रोने के लिए रात भी कम पड़ जाती हैं.

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