आज क्या हैं, चाय की कप से उठती धुँवा में

आज क्या हैं, चाय की कप से उठती धुँवा में
तेरी स्कल नजर आती हैं।
हम ऐसे खो जाते है तेरे खयालों मे की
अक्सर हमारी चाय ठंडी पड़ जाती हैं